यह चांद तो घटता, बढता है,छुपता है।
तेरे चहेरेका तिल बनके कभी रुकता है।
तेरी सादगीका में क्या नाम दुं सनम?
में क्या, तेरे आगे सारा जहां झुकता है।
तुझमें है फुलोकी कोमलता ओर खुश्बु।
सच है, कोई तुझे देखे तो मुझे चुभता है!
ऋतुकी रानी बहारोकी मलिका है तु।
हर शख्स क्यों तेरे ईर्दगिर्द घुमता है?
'नटवर'ने कही दिलकी सच्ची दास्तां
पर यारो,यहां कौन किसकी सुनता है?
तेरे चहेरेका तिल बनके कभी रुकता है।
तेरी सादगीका में क्या नाम दुं सनम?
में क्या, तेरे आगे सारा जहां झुकता है।
तुझमें है फुलोकी कोमलता ओर खुश्बु।
सच है, कोई तुझे देखे तो मुझे चुभता है!
ऋतुकी रानी बहारोकी मलिका है तु।
हर शख्स क्यों तेरे ईर्दगिर्द घुमता है?
'नटवर'ने कही दिलकी सच्ची दास्तां
पर यारो,यहां कौन किसकी सुनता है?
ટિપ્પણીઓ નથી:
ટિપ્પણી પોસ્ટ કરો
આપના હર સુચનો, કોમેન્ટસ આવકાર્ય છે. આપનો એ બદલ આભારી છું